उत्तराखंड

चंपावत प्रकरण में कांग्रेस का चेहरा बेनकाब मनवीर सिंह चौहान

चंपावत प्रकरण में कांग्रेस का चेहरा बेनकाब मनवीर सिंह चौहान

देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस चंपावत प्रकरण की सच्चाई सामने आने से तिलमिला गयी है और बेचैन है। कांग्रेस का व्यवहार उस बाघ के जैसे है जिससे उसका शिकार छीन लिया गया हो और वह अधिक आक्रामक हो जाए।

 

पार्टी कार्यालय मे पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि दुराचार की झूठी पटकथा गढ़ कर भाजपा के खिलाफ एक एजेंडा चलाने का एजेण्डा गढ़ने का सपना कांग्रेस का धूमिल हो गया और यह उसके लिए एक बड़ा आघात है। उन्होंने कहा कि न भाजपा का व्यक्ति षड्यंत्र मे शामिल था और न ही जेल गया। लेकिन कांग्रेसी जरूर षड्यंत्रकारियों के समर्थन मे रहे है यह सामने आ चुका है। षड्यंत्र के आरोप मे जेल गया कमल रावत का भाजपा से कोई लेना देना नही है। संदिग्ध गतिविधियों के कारण उसे दिसंबर 2022 में पार्टी से निकला गया और वह तब से कांग्रेस में सक्रिय है। सब जानते हैं कि वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ ही रहता है। पुलिस जांच मे यही मुख्य साजिशकर्ता के रूप मे सामने आया।

 

चौहान ने कहा कि जब सच्चाई सामने आ गयी तो कांग्रेस की हालत खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे जैसी हो गयी। हालांकि मामले मे उसकी असलियत सामने आने के बाद वह माफी मांगने के बजाय भाजपा पर ही तोहमत लगा रही है।

 

चौहान ने कहा कि एक नही आधा दर्जन से अधिक उदाहरण हैं जहाँ पर कांग्रेस ने दुष्प्रचार की असफल कोशिश की और जनता के सामने उसकी सच्चाई उजागर हो गयी। कानून व्यवस्था पर रोना धोना कर रही कांग्रेस का चेहरा तब देखने लायक था जब शिकायत कर्ता किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने सार्वजनिक माफी मांगी। गदरपुर के विधायक अरविंद पांडे की फर्जी चिट्ठी वायरल करने अथवा विगत सप्ताह चंपावत प्रकरण मे कांग्रेस का चेहरा फिर सामने दिखा।

 

चौहान ने कहा कि कांग्रेस सत्ता का सफर नैतिक सिद्धांतों की बलि चढ़ाकर झूठ और फरेब से पूरा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा मातृ शक्ति के अपमान को बर्दाश्त नही करेगी और जनता का आशीर्वाद उसे प्राप्त है। उन्होंने कहा कि राज्य सीएम पुष्कर सिंह धामी की पारदर्शी और जीरो टॉलरेंस की नीति पर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे मे दुष्प्रचार की आंधी विकास के रास्ते को नही रोक सकती है। कांग्रेस को रचनात्मक विपक्ष की भूमिका का निर्वहन कर आगे बढ़ने की जरूरत है, लेकिन उसके नकारात्मक कारनामों की लम्बी फेहरिश्त जनता के पास पहुँच चुकी है और उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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